ये मन झुंझला के अब कहता है,
काहे तू सब कुछ सहता है,
नहीं फतह होगा तुझसे ये,
छोड़ चला जाएगा फिर से,
इस समाज के कोलाहल में,
बीचों बीच फसेगा फिर से,
फिर से लोग हसेंगे तुझपे,
क्या जवाब है तेरा तुझसे|

मैंने हीं सोचा है इसको,
काहे चिंता है ये सब को,
हैं तो रण में कई धनुर्धर,
मै भी काटूं शीश धड़ा धड़,
है गहन समस्या आन पड़ी,
पर भीष्म प्रतिज्ञा मैंने करी,
आसमान के तारों को भी,
मै मुट्ठी में ले आऊंगा,
लोगों को दिखलाऊंगा,
जो भी चाहूं मै पाऊंगा,
हर मुकाम पाने से पहले,
लोहा भी लेना है सबसे,
ये जवाब है मेरा मुझसे|
ये जवाब है मेरा मुझसे 🙏||

written by Pranjul Pathak

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