इक जरा सी बात पर खुश हो लेते हैं हम,
गम देता है कोई तो चुपके से रो लेते हैं हम!


अश्क बहे आँखों से तो बन जाते हैं मोती,
उन मोतियों को भी लड़ी में पिरो लेते हैं हम!

चाहत भरे दिल में तो उठते हैं सैकड़ों तूफ़ान,
उन तूफानों को दिल ही में दफन कर लेते हैं हम!


चैन छीनकर अक्सर दर्द देती है दुनिया,
दर्द में भी अपना आशियां ढूंढ लेते हैं हम!


आस खो जाये तो जिंदगी लगती है बेमानी,
ढूंढकर कहीं से उसे जिंदगी रंगीन बना लेते हैं हम!


इक जरा सी बात पर खुश हो लेते हैं हम।।

Heartly written by Mrs Madhu Parashar

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