साथ देने का दूर तक वादा किया उसने,
साथ देगा कब तक मालूम नहीं।


मुहब्बत करने का दम भरता है वो,
मुहब्बत करेगा कब तक मालूम नहीं।


भीड़ में इक चेहरा लगा चाँद मुझको,
चांदनी बिखेरेगा कब तक मालूम नहीं।


है रौशनी सीने में उसके ही दम से,
रोशन करेगा कब तक मालूम नहीं।


कहते हैं हद होती नहीं प्यार की कोई,
हद से गुजरेगा कब तक मालूम नहीं।


लगती है प्यार को दुनिया की नजर जल्दी,
नजर से बचाएगा कब तक मालूम नहीं।


रूठ जाऊ उससे कभी दिल करता है,
क्या मनाएगा वो मालूम नहीं।


ख्वाबों में अक्सर देखा जिसे,
हकीकत में सामने आएगा वो मालूम नहीं।

Written by Madhu Parashar

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