हाय¡ तेरी नजरों का झरोखा,
जाने क्या क्या याद आ रहा है।

यूं तेरा मेरी बाहों में सिमट जाना,
तेरा पलको को झुकाकर मुस्कुराना,
जाते हुये पलटकर मुखड़ा दिखाना,
जाने क्या क्या याद आ रहा है।।

हाय¡ तेरी नजरों का झरोखा,
जाने क्या क्या याद आ रहा है।

यूं तेरा बालों में गजरा लगाना,
तेरा आंखों में कजरा लगाना,
पतली कमर से छुरियाँ चलाना,
जाने क्या क्या याद आ रहा है।।

हाय¡ तेरी नजरों का झरोखा,
जाने क्या क्या याद आ रहा है।

यूं तेरा चूड़ियों को खनकाना,
तेरी लटकन का झनक झनक जाना,
पलछिन से तेरा दीदार हो जाना,
जाने क्या क्या याद आ रहा है।।

हाय¡ तेरी नजरों का झरोखा,
जाने क्या क्या याद आ रहा है।

छोटी छोटी बातों में खफ़ा हो जाना,
तेरी सूरत से आइने का बेवफा हो जाना,
तेरी अश्कों का सूखकर लता हो जाना,
जाने क्या क्या याद आ रहा है।।

हाय¡ तेरी नजरों का झरोखा,
जाने क्या क्या याद आ रहा है।।

यूं तेरा रूठ कर चले जाना,
मेरे सपनों का तेरे ख़्वाबों से जुदा हो जाना,
बैठकर डोली में तेरा विदा हो जाना,
जाने क्या क्या याद आ रहा है।।

हाय¡ तेरी नजरों का झरोखा,
जाने क्या क्या याद आ रहा है।।

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3 thoughts on “जाने क्या क्या याद आ रहा है।”

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