जीना हो जाता है आसान, जब उम्मीद पास हो।
कटी फटी हथेली में कोई और हाथ हो।

राह हो गर मुश्किल तो कोई गिला नहीं,
चलते इन कांधो में जब तेरा साथ हो।

अनजानी राहों में भटक जाने को दिल करता है,
मचलती इन सांसों में जब उन्माद हो।

बेगानी इस दुनिया से हम क्या गुफ्तगू करे,
जब दिल की हर आंहो में तेरी ही बात हो।

पथ, साथ छोड़ देती है फिसल जाता हूं मैं,
जब तोड़ दिल तेरा, मरने की रात हो।

पत्थर इस दिल से निकल जाती है नदियां,
सुर्ख उन आंखों में जब बरसात हो।

लौट आते है दर पर ख़ाक सारी दुनिया,
तेरे इक झलक की जब उम्मीद काश हो।

दुश्मन इस जग से जंग छेड़ देती है नज़रें,
लटकते इन कांधों में जब तेरा हाथ हो।

तोड़ कर बंधन सारे लगा ले गले तुझको,
जंग लड़ती रातों में जब तू पास हो।

थक जाती है नज़रें टूट जाता है दिल,
दुश्मन में तेरे होने की जब बकवास हो।

छोड़ चले संगदिल बीच मझधार हमको,
अब मौत लगे प्यारी जब न तेरी आस हो।

जीना हो जाता है आसान,जब उम्मीद पास हो।
कटी फटी हथेली के कोई और साथ हो।

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