• लगे हो दुनिया की भाग दौड में,
    कभी अपनों में समय बिताते क्यूं नहीं।
    लगे हो दुनिया को खुश करने में,
    अपनों का सुख दुख बटाते क्यूं नहीं॥

    किये है कारनामें जीवन में तुमने,
    मुसीबत में काम आते क्यूं नहीं।
    लगे हो सिक्के की खनक के पीछे,
    जरूरत में हाथ बढाते क्यूं नहीं॥
  • लगे हो दुनिया को खुश करने में,
    कभी अपनों के काम आते क्यूं नहीं॥

    दिया है सिंहासन देकर मतदान तुझको,
    कभी अपना वादा निभाते क्यूं नहीं।
    लगे हो दुनिया को खुश करने में,
    अपनों की बेगारी मिटाते क्यूं नही॥

    बड़ी उम्मीदों से कदम निकले थे दर से,
    करके विश्वास तुम्हारे हुनर पर,
    बनाया था सर्वोपरि जीवन में अपने,
    अपनों को रास्ता दिखाते क्यूं नहीं॥
  • लगे हो दुनिया को खुश करने में,
    कभी अपनों के काम आते क्यूं नहीं॥

    ढ़ाया है कहर खुदा ने हम पर,
    कभी अपनों पर नज़र घुमाते क्यूं नहीं।
    लगे हो दुनिया को खुश करने में,
    अपनों की ज़ान बचाते क्यूं नहीं॥

    हालात है बद्तर घरों में अपने.
    अपनों का चूल्हा जलाते क्यूं नहीं।
    कैद कर दिया खुशियाँ हमारी,
    कभी भूखों को निवाला खिलाते क्यूं नहीं॥
  • लगे हो दुनिया को खुश करने में,
    कभी अपनों के काम आते क्यूं नहीं॥

    बुलाया है तुमको देख हाल देश का,
    कभी अपना करतब दिखाते क्यूं नहीं।
    लगे हो दुनिया को खुश करने में,
    देश की इज्जत बचाते क्यूं नहीं॥

    चुना था सबने निष्पक्ष होकर,
    कभी अपनी निरपेक्षता दिखाते क्यूं नहीं।
    छोड कर रास्ते दु:राजनीति की,
    दिल से तिरंगा लहराते क्यूं नहीं॥

    लगे हो दुनिया को खुश करने में,
    कभी अपनों के काम आते क्यूं नहीं॥

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