है धरा तुझे पुकारती, ऐ देश के महारथी,
है धीर तुम धरे चलो, ऐ वीर तुम बढे चलो,
ये वक्त नहीं है सोने का, पल-पल में आपा खोने का,
करले धरा की आरती, मॉ भारती, मॉ भारती॥

शस्त्र को तैयार कर, तू बढ ले सीना तानकर,
हौसलों को थाम ले, बस थोडा विश्राम ले,
बाधाओ को पारकर, साथियों को तैयार कर,
बाहों में बाहे डालकर, शस्त्र को सम्भाल कर,
है वक्त अब ये आ गया, घटा है नभ में छा गया,
है समर की शाम ये, तू लहू का जाम ले,
शस्त्र को सम्भाल कर, दुश्मन का तू सन्हार कर,
कर के धरा की आरती, मॉ भारती, मॉ भारती॥

संकट में धरा है आ रही, रात्रि दिन मे छा रही,
धुंध है रण में छा गया, तन को लहू है भा गया,
दुश्मन भी है घबरा गया,करतब है तेरा छा गया,
वीर तुम डटे रहो, चाल तुम चले रहो,
है वक्त अब ये आ गया, रण में पताका छा गया,
धर के ह्रदय में धीर तुम, लडे‌ चलो, बढे चलो,
बढ के पताका थाम लो, फिर तुम धरा का नाम लो,
कर के धरा की आरती, मॉ भारती, मॉ भारती॥

ऐ देश के महारथी, धरा तुझे पुकारती,
है धीर तुम धरे चलो, ऐ वीर तुम बढे चलो,
धरा का स्वाभिमान तुम,हो देश का सम्मान तुम,
करले धरा की आरती, मॉ भारती, मॉ भारती॥

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