आओ तुम्हे इश्क का नगमा सुनाते है,
फिर वही पुराने गीत गुनगुनाते है।

आये थे मेरी जिन्दगी में लेकर बहार तुम,
सावन से तेरे प्यार की बगिया सजाते है।

देखे थे जो सपने साथ मिलकर हमने,
उस ख़्वाब को जीकर हम रातें बिताते है।

बीत गये कई मौसम हाथों में हाथ लेकर,
हम तेरे इत्र से रूह अपना महकाते है।

रुत बीत गये हम तेरे दरश को तरसे,
यादों को संजों के हम अपना आशियां बनाते है।

सजी थी डोली चाँद सी दहलीज पर उनके,
चाँदनी से हम अपना आंगन जगमगाते है।

छोड़ चले दुनिया तुम अधूरा करके हमें,
अश्क अश्क गिनकर हम दुनिया चलाते है।

आज फिर नगमा ए इश्क सुनाते है,
फिर वही पुराने गीत गुनगुनाते है।

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