अपने घर की दरो दीवारों में,

तुम हमेशा नजर आती हो।

हर पल, हर घडी यूं लगे,

जैसे मुझे देखकर मुस्कुराती हो

मा‍ँ! तुम बहुत याद आती हो॥

 

नहीं भूलती तुम्हारी वो मीठी प्यारी बातें,

सीने में छिपाये बैठी हूँ ढेरों पुरानी यादें,

उन यादों के घेरों में अक्सर,

तुम हमेशा साथ होती हो।

मा‍ँ! तुम बहुत याद आती हो

 

ढूंढा तुम्हें हर अपने में, पर तुम न मिली,

चाहा तुम्हे हर रिश्ते में, पर तुम न दिखी,

आंखों की नमी में तुम ही,

आंसू बन कर बह जाती हो।

मा‍ँ! तुम बहुत याद आती हो।

 

है सभी, पर कोई नहीं है,

चेहरे बहुत है, पर कोई तुमसा नहीं है,

पापा, भाई, बहन, भावजी सभी प्यारे है,

भरी पूरी दुनिया है मगर, प्यार कोई तुमसा नहीं है।

मा‍ँ! तुम बहुत याद आती हो

 

बंद आखों के सपने में, अक्सर मौज़ूद रहती हो,

खुली आंखों के उजालो में, चुपके से भाग जाती हो,

कभी रात में तारा बन टिमटिमाती हो,

तो कभी ख्वाबों में बसकर रातें जगमगाती हो।

पर कुछ भी हो, मा‍ँ! तुम बहुत याद आती हो

मा‍ँ! तुम बहुत याद आती हो

Written by Mrs. Madhu Prashar

 

If you like the post please like, comment and share. Please mention name at your comment..

If you want to post your own creation can contact us.

8 thoughts on “मा‍ँ! तुम बहुत याद आती हो।”

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!