हो गई इंतिहा तब, मेरे इश्क की,
सज रही आज डोली, मेरे इश्क की।
हम तो गैरो से अब, क्यूं ये शिकवा करें,
जब दिखी इक झलक न, मेरे इश्क की।।

हो गई इंतिहा तब, मेरे इश्क की।।

हो गई इंतिहा तब, मेरे इश्क की,
सज गई आज डोली, मेरे इश्क की।।

रो रही हर दीवारी, मेरे इश्क की,
कह रही हर कहानी, मेरे इश्क की।
झुमका, कंगन, पैजनिया खनकने लगे,
जब मिली एक आहट, मेरे इश्क की।।

हो गई इंतिहा तब, मेरे इश्क की।।

हो गई इंतिहा तब, मेरे इश्क की,
उठ गई डोली जब, मेरे इश्क की।।

घर लगे सूना-सूना, मेरे इश्क की,
जग लगे बहका-बहका, मेरे इश्क की।
अश्क सारे मेरे अब, बरसने लगे,
ढूंढे नज़रे महक जब, मेरे इश्क की।।

हो गई इंतिहा तब, मेरे इश्क की।।

हो गई इंतिहा तब, मेरे इश्क की,
उठ गई डोली जब, मेरे इश्क की।।

दिन लगे दहके-दहके, मेरे इश्क की,
रत कटे गम को सहते, मेरे इश्क की।
सब्र दिल का मेरे अब, ढहने लगे,
जाके रोको कोई, डोली, मेरे इश्क की।।

हो गई इंतिहा तब, मेरे इश्क की,
उठ गई डोली जब, मेरे इश्क की।।
उठ गई डोली जब, मेरे इश्क की।।

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