आज ख़्वाहिशें अपनी तय करने की कोशिश की,
ज़िन्दगी के लम्हों में रंग भरने की कोशिश की।।

माँ की ममता में लाली का लाल आया,
पिता के हिस्से में सलेटी रंग था छाया।
माँ के प्यार में गुलाब सा महक था,
पिता के डांट में नारियल सा दहक था।।

बहनों की लाड ने कुछ यूं रंग बनाया,
भावों को मिला प्यार का गुलिस्तां खिलाया।
भइया के झगडे़ ने कुछ यूं प्रभाव दिखाया,
रंगत में उनके मार्तण्ड था समाया।।

कमीने दोस्तों की यादों में जब रंग डाला,
जवाब दे दिया कलम ने, मुझको हिला डाला।
याद करके मैं बातें उनकी भरता गया रंग,
निखरी रंगत ऐसी, जैसे वर्षा में सतरंग।।

याद करने लगा जब जीवन का सफर,
देख बीता समय मैं डरा इस क़दर।
रंग जीवन में अपने कुछ भर न सका,
खुशियो में मेरी यादों का असर ही न था॥

जीवन में हर रंगत को खोजने की कोशिश की,
ज़िन्दगी के लम्हों में रंग भरने की कोशिश की।।

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8 thoughts on “रंग ज़िंदगी के”

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