हमसे होती नहीं पूरी रस्मे सारी
और तुम दोस्ती निभाए चले जाते हो।
चाह कर भी कुछ कह नहीं पाते हम
और तुम दिल का हाल बताये चले जाते हो।


क्योंकर बनती और बिगड़ती है तस्वीरे,
क्यों दिलों में खिंच जाती हैं लकीरें,
ढीली हो जाती है रिश्तों की डोर हमसे,
और तुम इसे मजबूत किये जाते हो।

हमसे होती नहीं पूरी रस्मे सारी
और तुम दोस्ती निभाए चले जाते हो।|

मिलते हो तुम तो दुनिया देती है ताना,
है उसकी नजर में रिश्ता वही पुराना,
डर से उसके पीछे हटते जाते है हम,
और तुम खींच के आगे किये जाते हो।


दिल तो आखिर दिल है, पत्थर नहीं बन सकता,
भरे हैं अरमां इसमें, खिलौना नहीं बन सकता,
फिर भी इस दिल को पत्थर बना लेते है हम,
और तुम बातों से अपनी, इसे पिघला जाते हो।


हमसे होती नहीं रस्मे पूरी सारी
और तुम दोस्ती निभाए चले जाते हो||

Written by Mrs. Madhu Prashar

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