यू खुद को अकेला, न समझ रहगुजर,
जिन्दगी भर तेरा साथ निभायेंगे हम।।

तू जहाँ भी रहे, जैसे भी रहे,
मेरा नाम पुकारते ही, चले आयेंगे हम।
गर जिन्दगी तुझे गम दे, तो रो लेना,
तेरे लिये कांधा लेकर, आयेंगे हम।।

यू खुद को अकेला, न समझ रहगुजर,
जिन्दगी भर तेरा साथ निभायेंगे हम।।

क्या हुआ गर दुनिया ने जुदा हमें किया,
जात-पात, रिश्ते-नातों ने बुरा-भला किया,
पर मत होना उदास, ओ मेरी जान-ए-मन,
दुनिया को करतब दिखाने, लौटकर आयेंगे हम।।

यू खुद को अकेला, न समझ रहगुजर,
जिन्दगी भर तेरा साथ निभायेंगे हम।।

माना कि बहुत संज़ीदियां ढाई है तुझ पर,
कतर के पंख सारे, पिंजडे़ में कैद किया।
पर रखना ऐतबार, मेरे वादों पर जां-निसर,
कैदों को तोड़कर इक दिन, गगन में छायेंगे हम।।

यू खुद को अकेला, न समझ रहगुजर,
जिन्दगी भर तेरा साथ निभायेंगे हम।।

है राह मुन्तशिर, पहरेदार है दुनिया,
कांटे बिछे है राह पर, जिस्म कतरा हो गया।
पर रखना यकीन खुदा पर, बना है राह मुन्तशिर,
मर कर भी तेरे खातिर, लौट आयेंगे हम।।

यू खुद को अकेला, न समझ रहगुजर,
जिन्दगी भर तेरा साथ निभायेंगे हम।।

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