जीवन में खुशियों का पोल क्या है,
माँ-बाप के त्यागों का मोल क्या है,
किस राह, किस डगर में ज़िंदगी बदल जायेगी,
हस्ते, खिलखिलाते बचपन का रोल क्या है॥

दर्द-ए-इश्क़ का झोल क्या है,
तड़पते दिलों का माहौल क्या है,
चंद रोज में फिर जाते है परवाने,
ग़र यही इश्क़ है तो माखौल क्या है॥

छोड़ चले आंगन, कि खुशियाँ मिल जाये,
दौड़ती इस दुनिया में, दुनिया मिल जाये,
ग़र पैसों की बारिश में मिल जाती है खुशियाँ,
तो रिश्तों के बंधन का ज़ोर क्या है॥

किस राह पर चले तो मंज़िल मिल जाये,
राह में बिछ्डे़ हुये संगदिल मिल जाये,
गर जीत जाना है मकसद-ए-ज़िंदगी,
तो सुख-दुख का जीवन में गोल क्या है॥

माँ के आंचल में, क्यूं ज़िंदगी मिल जाये,
बिन बोले ही ज़िंदगी की, हरखुशी मिल जाये,
कब लौट कर आयेगी, वो बचपन की मस्ती,
वो बारिश की रिमझिम, वो कागज की कस्ती॥

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