This is a poem of a man that did every possibilities for his love but she dumped him, and after that how he gathered himself and make a new life titled with ‘bewafa sanam.’

कविता- बेवफा सनम
 
क्या सोचा था मैनें तेरे वादों को सुनकर,
ख़्वाब गढ़ते हुये इन इरादों को सुनकर,
चाँद की रौशनी धरती पर लायेंगे,
आशियाना-ए-इश्क में चांदनी सजायेंगे।।
 
चलेंगे लेकर साथ हम दिन हो या रात,
करेंगे पूरे ख्वाब होगा हाथों में हाथ,
इश्क में तेरे ज़र्रा-ज़र्रा बिख़र जायेंगे,
हम दो हमारा एक, गुलिस्तां सजायेंगे।।
 
हमने तेरे इश्क में क्या लम्हें गुजारे,
भटकते हुये दिन रात तेरा नाम पुकारे,
देखा था जो सपना वो टूट गया,
इतराते थे जिसके इश्क में वो रूठ गया।।
 
मेरे ख़्वाबों में किसी का ज़िक्र नहीं था,
दौड़ते रहे दिन-रात किसी का फ़िक्र नहीं था,
जिनको कांधों में लेकर सिर पर बैठाया,
देकर अपनी जवानी इक आशियां बनाया।।
 
फिर दिन वही आया, वहीं बारिश का पानी,
छोड़ चल पडे़ थे गढ़ने इक नई कहानी,
अपने यादों को गढ़ के इक घर बनाया,
पूजकर माँ-बाप जिसने हौसला बढ़ाया।।
 
कर किताबों से दोस्ती, कलम हथियार बनाया,
अपने लेखों के दम पर, संसार जगाया।।
 
12 thoughts on “A beautiful poem about man whose girl friend dumped him titled with ‘bewafa sanam’”

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