A beautiful poem about who made promise to himself.
 
कविता- फैसला कर लिया है
 
आज मैनें इक फैसला कर लिया है,
खुद से खुद में हौसला कर लिया है।
 
देश को अपने आगे बढ़ाना है,
प्रयासों से अपने विश्व गगन में छाना है।
 
न गरीबी का दंश हो, न भ्रष्टाचार का श्राप,
मिल-जुल के हम तुम करे इसको साफ।
 
छुआछूत और जातिवाद जो है अभिशाप,
मिलकर सबको लाना है इक दूजे के साथ।
 
योग, चिकित्सा, आयुर्वेद को अपनाना है,
भारत तुझको ज्ञान पुरातन को बतलाना है।
 
फिर एक बार नया आसमां बनाना है,
देश को अपने विश्व गुरू बनाना है।।
 
जय हिन्द

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