This poem is about to touch of a baby to her father and her importance in his life.
How a father care and his love.
 
कविता- स्पर्श
 
एक उसका स्पर्श ही है जिसके सहारे मैं ज़िंदगी जीता हूँ,
 
उसकी नज़रों के सहारे ही मैं ज़िंदगी के पैमाने पीता हूँ,
 
उसकी एक झलक के लिये मन मेरा भटकता है,
 
उसके प्यार के अहसास के लिये मेरा दिल तरसता है,
 
पूछो न मेरा उससे रिश्ता, वो बेटी और मैं पिता॥

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