Category: moral

धरती का चांद

एक बार मैं यानी राजू अपनी छुट्टिया मनाने बिलासपुर (छत्तीसगढ) से लौट कर कटनी आ रहा था। हमेशा कि तरह मैने बिलासपुर-रीवा पैसेंजर में जनरल के डिब्बे में सफर कर…

साथ-जिन्दगी भर का

यू खुद को अकेला, न समझ रहगुजर,जिन्दगी भर तेरा साथ निभायेंगे हम।। तू जहाँ भी रहे, जैसे भी रहे,मेरा नाम पुकारते ही, चले आयेंगे हम।गर जिन्दगी तुझे गम दे, तो…

चार दिवारी- आज़ादी अभी बाकी है

मत रोको मेरे अरमानों को,आज मैं आसमां में उडना चाहती हूँ।मत रोको मेरे पायलों को बजने से,आज मैं खुलके दुनिया देखना चाहती हूँ॥ कोई रोको न, उडने दो बालों को…

error: Content is protected !!