(अगर आपने कहानी का पिछ्ला भाग नहीं पढा है, तो पिछ्ले भाग को पढने के लिये नीचे लिंक पर क्लिक करे)
भाग -1 – https://abhirewadi.in/filmyrockers/
भाग -2 – https://abhirewadi.in/filmyrockers-2/
भाग -3 – https://abhirewadi.in/filmyrockers-3/
भाग -4 – https://abhirewadi.in/filmyrockers-4/
भाग-5 – https://abhirewadi.in/filmyrockers-5/

रणवीर के ड्रग्स के कारण 8 लोगो की मौत हो गई और उसने इसी ड्रग का पाउच सोनिया को भी दिया था। तब वह सोनिया को ढूढता हुआ अस्पताल पहुंचा, तो उसने देखा कि चारो ओर मातम का माहौल पसरा हुआ था। वह किसी तरह सोनिया के बेड तक गया, तो पता चला कि उसकी तबियत बहुत नाजुक है और बचने के चांस बहुत ही कम है। उसने डॉक्टर को पैसे दिए और अच्छा से अच्छा इलाज करने की बात कहकर वसीम के अड्डे निकल गया।

अड्डे में पहुंचकर वसीम से गुस्से से बोला।
वसीम – देख मैं नहीं जानता था, कि वह ड्रग्स इतना खतरनाक है। मुझे तो बस पार्सल मिला था, कि उसे बार में पहुंचाना है, तो तू नहीं पहुंचाता या कोई और।
रणवीर – अरे तुझे कुछ फर्क नहीं पड़ता, वहां इतने सारे लोग मर गए और कितनों की हालत खराब है और सोनिया भी तो।
वसीम – क्या सोनिया, सोनिया को भी तूने यह ड्रग्स दिया था।
रणवीर – हां वो सैंपल का पैकेट मैने उसे दिया था।
वसीम – शांत रह तू, देख वो ठीक हो जाएगी, मैं देगा न इलाज का पैसा, करा तुझे जहां इलाज कराना हो। विदेश भी ले जाना हो, तो लेजा मैं देगा सारा पैसा।
रणवीर – और बाकी लोग जो मर गए उनका क्या?
वसीम – देख भाई, ये ड्रग्स का धंधा तो वैसे भी मौत का धंधा है, आज नही तो कल होना ही था। तू परेशान न हो, जा सोनिया का मजा इलाज करा और तू पुलिस की टेंशन मत लेना, बाकी सब मैं संभाल लेगा, तेरा नाम नही आयेगा।

रणवीर अस्पताल आया, तो देखा कि सोनिया की मृत्यु हो गई। वह सोनिया की मौत का कुसूरवार खुद को मानने लगा और ड्रग्स का धंधा छोड़ दिया। रघु और वसीम ने उसे कई बार समझाया और धमकी दी, लेकिन उसने अड्डे पर जाना पूरी तरह से बंद कर दिया। जैसे रणवीर को जीने की इच्छा ही नहीं रह गई, उसने 2 बार आत्महत्या की कोशिश भी की। खाना – पीना सब छोड़ दिया, न दिन का ठिकाना और न रात का। बस शराब के नशे में कही भी घूमता रहता।

अब सोनिया की मौत को 10 महीने होने लगे और रणवीर की ज़िंदगी भी धीरे-धीरे पटरी पर आने लगी। फिर राणा साहब और रिया की पार्टी में बेमन ही सही रहना पड़ता था। अब उसने शराब पीना और नशा पूरी तरह से त्याग दिया, लेकिन यादों में कही सोनिया को जिंदा रखे, नये रास्ते की तलाश में जुट गया।

रणवीर ने फिर से थियेटर करने का निर्णय लिया, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली और गुरुजी ने सीधे तौर पे उसे मना कर दिया। फिर भी उसने हार नहीं मानी और वह रोज जाकर थियेटर के बाहर खड़ा रहता और सबके जाने के बाद ही घर जाता। इसी तरह लगभग 1 महीने बीत चुके थे, लेकिन वह अभी भी अपने विश्वास में अडिग था। एक दिन गुरुजी ने उसे अंदर बुलाया।
गुरुजी – क्यूं भाई, कोई काम धंधा नहीं है क्या? जो रोज आकर खड़े रहते हो।
रणवीर चुपचाप खड़ा रहा।
गुरुजी – अब तो इनकी जुबान भी बंद हो गई, पहले तो कैंची की तरह कच-कच चलती थी। जाओ भाई, कोई काम धंधा ढूंढो, यहां कोई जगह नही है।
रणवीर वही खड़ा रोने लगा। गुरुजी ने उसे पानी दिया और पास बिठाया।
गुरुजी – क्या हुआ? बड़ा परेशान लग रहा है। कोई समस्या है, तो बोल रो क्यूं रहा है।
रणवीर – कोई समस्या नहीं, बस आप मुझे थियेटर में वापस ले लीजिए।
गुरुजी – चल जा काम पर लग जा, कामिनी तुझे तेरा काम समझा देगी।
रणवीर ने गुरुजी के पैर छुए और चला गया।

रणवीर को थियेटर में काम करते हुए 8 महीने बीतने लगे और इस बीच उसने कई शो किए और धीरे धीरे उसका नाम फेमस होने लगा। एक दिन रणवीर अपने शो की तैयारी में व्यस्त था, तभी उसका फोन बजा।
रिया – रणवीर, कहा हो?
रणवीर – रिया, वो मैं काम से बाहर आया था।
रिया – कब तक आओगे?
रणवीर – रिया, शाम हो जाएगी।
रिया – ऐसे-कैसे तुम बंगला छोड़ कर कहीं जा सकते हो। तुम्हे बंगले की देखभाल के लिए रखा है या ऐश करने के लिए।
रणवीर – सॉरी रिया, अगली बार से शिकायत का मौका नहीं मिलेगा।
रिया – मिलना भी नही चाहिए, नही तो अगला मौका आखिरी होगा।
रणवीर – जी मैडम, नही मिलेगा।

रिया जोर जोर से हंसने लगी।
रिया – एक ही बार में रिया से मैडम में आ गए। थोड़ी बहुत एक्टिंग तो मैं भी कर लेती हूं।
रणवीर – मैं समझा नही।
रिया – कुछ नही, मैं और अविनाश (रिया के पति) आज थियेटर देखने आए थे, लेकिन यहां तो बहुत भीड़ है और टिकट नहीं मिल पा रही। सुना है, तुम्हारी यहां बड़ी पहचान है।
रणवीर – रिया तुम थियेटर में हो, मैं अभी आया।
रणवीर ने दोनो को अंदर बुलाया और सबसे परिचय कराया। उसने दोनो को सामने की दो विशेष सीट दी।

शो खत्म होने के बाद,
रिया – तुम तो छुपे रुस्तम निकले, इतने सालो से हमारे यहां रह रहे हो, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगने दी।
रणवीर – बचपन का शौक था, कानपुर में भी रामलीला करता था, तो यहां भी शुरू कर दिया।
अविनाश – नाइस एक्ट मैन।
रणवीर – धन्यवाद सर। अब आगे का क्या प्लान है।
अविनाश – बस साथ में डिनर करेंगे और फिर होम स्वीट होम।
रणवीर – क्यूं, न सब लोग पेंट हाउस चले। आप लोग तो होटल में खाते रहते है, आज इस गरीब को भी मौका दीजिए।
रिया – नही, फिर कभी आज अविनाश का बर्थडे है और ये शाम दोनो साथ में बिताना चाहते है।
रणवीर – हैपी बर्थडे सर।
अविनाश – ओह, थैंक्स ब्रो। थैंक्स आलसो फॉर दी सीट।

कुछ दिन बाद रिया का फोन आया।
रिया – (गाने के अंदाज में ) मौका… मौका। मौका…. मौका।
रणवीर – हेलो, ये मौका-मौका क्य है।
रिया – कभी अजय से मिले हो।
रणवीर – कौन अजय?
रिया – अजय देवगन।
रणवीर – (चौकते हुए) नहीं तो।
रिया – मिलना है।
रणवीर – बिल्कुल।
रिया – नेक्स्ट मंथ 8 को एक एड कंपनी 4 दिन के लिए बंगला रेंट पर ले रही है। अजय देवगन का एड शूट है। बंगला का लुक देख लेना।
रणवीर – जी मैडम।
रिया – बेस्ट ऑफ लक।

रणवीर बहुत खुश था, उसने पहले ही थियेटर से 4 दिन की छुट्टी ले ली। उसके मन में अपने लिए एक मौका दिख रहा था, शायद किस्मत चमक जाए।

आठ तारीख को 10 बजे तक टीम बंगले में पहुंच गई और सेट अप तैयार करने लगी। पता चला कि 4 दिन में कुल 4 एड फिल्म की शूट होनी है और अजय सर तीसरे या चौथे दिन आने वाले है। वह भी शूट कंपनी की मदद में लग गया। अगले दिन एड शूट शुरू हो गया और उस दिन 2 शूट होने वाले थे। जबकि तीसरे दिन 2 शूट होने थे और यदि न हो सके तो चौथे दिन करने थे। दूसरे दिन एक एड फिल्म शूट हुआ, लेकिन दूसरे एड फिल्म में एक्टर के न आ पाने के कारण शूट रुक गया।

तीसरे दिन अब तीन शूट किए जाने थे, जिसमे से पहला शूट 2 बजे तक पूरा हो चुका था और अजय सर चौथे दिन आने वाले थे, लेकिन आज भी वो एक्टर नहीं आ सके। जिससे शूट का काम आज भी रुका हुआ था। वही क्रू मेंबर में से कुछ लोग अभिनय करने लगे, जिसे रणवीर गौर से देख रहा था। उसे भी अपनी अभिनय दिखाने का मौका मिल गया, तो वह भी उनमें शामिल हो गया। उसकी अभिनय और संवाद का तरीका (डायलॉग डिलीवरी) को देख सब प्रभावित थे। तभी क्रू मेंबर में से किसी ने निर्देशक को जाकर बताया। निर्देशक को भी उसका अभिनय अच्छा लगा। कुछ ही देर में वह एक्टर वहां आ गया और सभी शूट की तैयारी में लग गए। रणवीर भी उदास मन से जाकर बैठ गया। शूट खत्म होने के बाद सब चले गए।

आज की रात रणवीर को नींद नहीं आने वाली थी, उसे लगा कि सुनहरा मौका हाथ से निकल गया और वह रात भर अपनी किस्मत को कोसता रहा और करवट लेते रात गुजर गई।

अगला दिन शूट का आखिरी दिन था और आज अजय सर का शूट होने वाला था। शूट 12 बजे शुरू हो गया और लगभग 1 बजे अजय सर शूट पर आये। 2 घंटे के शूट के बाद सब शूटिंग खत्म हो गई और सब जाने लगे। रणवीर को तो अजय सर से मिलने का मौका भी नही मिला, उसने बस दूर से ही उनको शूट करते देखा। वह जाकर अपने कमरे में लेट गया। इधर शूट खत्म होने के बाद सामान समेटने लगे, लगभग 5 बजे एक क्रू मेंबर उसके पास आया और काम खत्म होने की सूचना दी। वह बेमन ही गया और बंगले को निहारने लगा। तभी निर्देशक ने उसे अपने पास बुलाया।

निर्देशक – हे यंगमैन, लुकिंग टायर्ड।
रणवीर – यस सर।
निर्देशक – मैने तुम्हारी एक्टिंग देखी, क्षमता है तुम्हारे अंदर।
रणवीर – (खुशी से) धन्यवाद सर।
निर्देशक – तुम्हारा नाम क्या है?
रणवीर…. रणवीर गुप्ता। निर्देशक ने एक डायरी में नाम और फोन नंबर लिखा और अपना कार्ड दिया। काम होने पर कॉल करने की बात कही।

आज रात फिर रणवीर की नींद गायब थी, लेकिन यह खुशी की रात थी । अब तो सारी थकान भी गायब हो गई।…….
अब जिंदगी, रणवीर के साथ क्या खेल खेलने वाली है वह उसे फर्श से अर्श पर ले जाएगी या फिर पटकेगी। जानने के लिए देखिये अगले भाग मे…।

(नशा करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। हम किसी भी प्रकार से नशे का समर्थन नहीं करते है। हम आपके सुरक्षित भविष्य की कामना करते है।)

One thought on “FilmyRockers-Battle of life (Part -6) फिल्मीरॉकर्स-ज़िंदगी-ए-जंग (पार्ट-6)”

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!