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रणवीर के मन में निर्देशक साहब की बातो को लेकर बेसबरी बढती जा रही थी और उसके फोन मे बजने वाली हर घंटी उसके विश्वास की आजमाइश करती। रणवीर भी मन ही मन बहुत खुश था और अब तो वो थियेटर में और भी चर्चित हो गया। जो उसके उत्साह में लगातार वृद्धि कर रही थी, वह नाटक में दुगुनी स्फूर्ति से काम कर करता। जिससे उसके अभिनय में और भी निखार आने लगा। रणवीर को निर्देशक साहब के फोन का इंतेज़ार करते एक महिने से अधिक होने लगे, लेकिन वह अपने मन को यह कह के समझा लेता था कि इन सब में समय तो लगता रहता है। कई बार तो उसने भी निर्देशक को फोन करने का विचार किया, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पाया।

रणवीर और उसके ख्वाब के बीच अब केवल एक फोन की दूरी थी, जो कि समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रही थी। फोन का इंतेज़ार करते अब दो महिने से अधिक होने लगे, अब तो उसका विश्वास भी डगमगाने लगा। पिछ्ली कुछ समय के अनुभव से उसका अपनी किस्मत से विश्वास भी खत्म होने लगा था। इस बात को लेकर वह तनाव में रहने लगा, दिन-रात उसके मन मे यही बाते गूंज रही थी। उसकी हालत देखकर कुछ दोस्त (राकेश और प्रकाश) उसे बियर बार ले गये और जबर्दस्ती शराब पिलाने लगे। उसके लाख मना करने पर भी प्रकाश नहीं माना और जबरन शराब की एक बोतल उसके मुह से लगा दिया। अब तीनो पर शराब की खुमारी धीरे-धीरे छाने लगी, जिस पर दोनो ने निर्देशक को बुरा भला बोलना शुरु कर दिया। दोनो का मानना था, कि रणवीर के मन से फोन न आने का दुख निकल जाएगा और वह फिर काम पर लग जाएगा।

अब रात के 12 बजने लगे, रणवीर को उसके दोस्त घर छोडकर निकल गये। रणवीर ने सालभर शराब को हाथ तक नहीं लगाई थी, इसलिये उसका खुद पर कोई नियंत्रण ही नहीं रहा। इसीलिये राकेश और प्रकाश की योजना धरी की धरी रह गई, जिसने उसके ऊपर अलग ही प्रभाव डाली। अब वह अपने आप को छला हुआ महसूस करने लगा और निर्देशक द्वारा खुद को छले जाने की बात सोचने लगा।
रणवीर(शराब के नशे मे)- साला! ये कमीना निर्देशक अपने आप को समझता क्या है, वो साला मुझको धोखा देता है। इसकी *******। अभी बताता हूँ साले, क्या सोचता है उसके बिना मुझे फिल्मो में काम नहीं मिलेगा। जानता नहीं मुझको मै… मै कौन हूँ। जब मै स्टार बन जाऊंगा, इसको तो घास नहीं डालूंगा। अभी बताता हूँ साले…..।

रणवीर ने निर्देशक को फोन लगा दिया।
निर्देशक- हेलो! कौन?
रणवीर- डायरेक्टर साहब! नमस्कार।
निर्देशक- नमस्कार, जी कौन बोल रहे है आप?
रणवीर- मै……मै रणवीर बोल रहा हूँ।
निर्देशक- कौन रणवीर?
रणवीर- हाँ….हाँ, अब मै आपको याद भी कैसे रहूंगा, दो महिने पहले आप लोग जूहू मे एड फिल्म के लिये आये थे, मैं उसी बंगले का केयर टेकर।
निर्देशक- याद आया, सॉरी…..सॉरी मै तुमको फोन करना भूल गया। अभी रात बहुत हो गई है, कल सुबह बात करते है। गुड नाइट यंग मैंन।
रणवीर- सु….. सुनिये तो……(फोन कट गया)।

अगले दिन सुबह रणवीर देर से जागा, जल्दी से नहा धोकर तैयार हो गया। वह पिछली रात की बात को लेकर बहुत शर्मिंदा था, वह निर्देशक साहब को फोन करना चाहता था, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। बैठकर अपने आप को कोशने लगा, इतने दिनो बाद डायरेक्टर साहब को फोन लगाया भी तो इस हालत मे। अब मै उनको कैसे फोन लगाऊ, क्या बात करूं। यही सोचते-सोचते शाम होने चली। आज रणवीर का मन कही नहीं लग रहा था, उसने बिमारी का बहाना बनाकर थियेटर से भी दो दिन की छुट्टी ले ली। रणवीर मोबाइल बंद करके आराम करने लगा।

करीब आधे घंटे बाद हाल का फोन बजने लगा। घंटी बजते ही उसके मन में सिरहन दौडने लगी, किसका फोन होगा, कही ये डायरेक्टर साहब का फोन तो नहीं। अरे, उनका कैसे होगा, उनके पास तो इस घर का फोन नम्बर भी नहीं होगा। उनके पास तो मोबाइल नम्बर था, लेकिन उसमे तो फोन ही नहीं किया। फोन उठाने ही वाला था, कि तभी याद आया कि मोबाइल तो बंद है तो कही सच में डयरेक्टर साहब का फोन तो नहीं। तभी फोन की घंटी रुक गई। वह वही खडा फोन का इंतेज़ार करने लगा, जब थोडी देर तक फोन नहीं आया, तो वह तुरंत जाकर मोबाइल चालू किया। और मन ही मन सोचने लगा, चाहे किसी का भी फोन हो, अब डरना नहीं है। हो गई गलती, तो क्या ज़िंदगी भर मुंह छुपाकर घूमुंगा।

करीब एक घण्टे बाद मोबाइल की घण्टी बजी। देखा तो रिया का फोन था।
रिया- क्या हालचाल है, मोबाइल बंद, फोन भी नहीं उठ रहा, मिज़ाज बदल गये है।
रणवीर- नहीं रिया, थोडी तबियत खराब थी।
रिया‌- क्यूं, रात की उतरी नहीं क्या?
रणवीर सोचने लगा, इसे कैसे पता कल तो सालो बाद शराब पी थी।
रिया( जोर से हसते हुये)- अरे मज़ाक कर रही हूँ। हाँ अच्छे कपडे तो है न तुम्हारे पास।
रणवीर- क्या हुआ रिया?
रिया- हमे एक घण्टे में पार्टी में जाना है, बढिया सा कपडा पहनकर आना।
रणवीर- मै नहीं जा पाउंगा, बताया तो तबियत खराब है।
रिया- मै कुछ नहीं सुनना चाहती, ठीक एक घंटे मे मै आ रही हूँ।

रणवीर का मन बेचैन था, इतने सालो में तो कभी मुझे पार्टी में नहीं ले गई, लेकिन आज अचानक। वह जल्दी से कपडे छाटने लगा, एक घण्टे मे तैयार होकर वह रिया का इंतेज़ार करने लगा। साढे नौ बजे रिया अविनाश के साथ आई और तीनो एक पांच सितारा होटल में पहुचे। रणवीर इतने सालो में पहली बार किसी पांच सितारा होटल के अंदर घुसा था, उसे तो बंगला ही महल की तरह लगता था, लेकिन ये तो लाजवाब था। तीनो जाकर एक टेबल में बैठ गये और किसी का इंतेज़ार करने लगे। कुछ ही देर में एक हैण्डसम सा आदमी वहा आया, सबसे मुलाकात की और सामने की टेबल में बैठ गया।

अविनाश सर ने उनका परिचय राजीव कुमार कराया।
रणवीर- हेलो! सर।
राजीव- हेलो! यंग मैन। क्या हालचाल है?
रणवीर को आवाज़ जानी पहचानी लगी, अरे ये तो निर्देशक साहब है।
रणवीर- बढिया हूँ सर, मस्त हूँ।
रिया(हंसते हुये)- सुबह से इनकी तबियत खराब थी और तुमको देखते ही ठीक हो गई।
रणवीर- सॉरी सर! कल रात मैने शराब के नशे में आपको काल किया और पता नहीं मैने क्या-क्या बोला। वो दोस्तो ने जबरदस्ती पिला दी, वैसे मैं पीता नहीं हूँ।
राजीव- दैट्स रॉन्ग थिंग। पीना गलत नहीं, हम भी पीते है और आज तुम्हे भी हमारे साथ पीना होगा।

खाना ऑर्डर करके तीनो आपस में कुछ डिस्कस करने लगे, रणवीर वहा बैठा बोर होने लगा। उसे लगा था, कि शायद वो लोग उसके एक्टिंग की बात करेंगे और इसी बहाने उसे एक्टिंग का मौका मिलेगा। लेकिन यहाँ तो कुछ और ही खिचडी पक रही थी।
उससे बात करना तो दूर कोई उसकी तरफ देख भी नहीं रहा था। तभी खाना आ गया, लेकिन किसी ने खाने की तरफ देखा तक नहीं और अपने में ही व्यस्त रहे। रणवीर को उनकी बात कुछ समझ नही आ रही थी, लेकिन उसको इतना समझ में आ रहा था, कि बात अविनाश की कम्पनी के कोई एड बनाने की बात हो रही थी।

कुछ देर में सबने खाना खाने लगे और अभी भी उनकी बातचीत जारी रही। अब समझ में आने लगा था, कि बात जल्दी ही खत्म होने वाली है। तभी अचानक अविनाश सर और निर्देशक साहब ने किसी कागज मे हस्ताक्षर किये और हाथ मिलाया।
तभी रिया ने बीच में बोला- बाकी सब तो ठीक है, लेकिन हीरो से तो पूछ लो ( और सब हंसने लगे)।
रिया ने बताया कि अविनाश सर की कम्पनी का एड राजीव सर बनायेंगे, जिसमे लीड रोल में रणवीर एक्टिंग करेगा। वह खुशी से पागल हो गया और रोने लगा, उसके आंसू तो रुकने के नाम ही नहीं ले रहे थे।
राजीव‌‌- ये तो रो रहा है, शायद इसे बात जमी नहीं। तो फिर इसको कैंसल करते है और किसी और को साइन करते है।
अविनाश- हाँ, ठीक है। जब इसकी इच्छा ही नहीं है, तो ज़ोर नहीं देना चाहिये।
रिया- हाँ…. हाँ किसी और को ही देखते है।
रणवीर को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था, वह अचरज़ भरी नज़रो से उनको देखने लगा। अचानक सभी उसकी तरफ इशारा करके हंसने लगे।

अब जिंदगी, रणवीर के साथ क्या खेल खेलने वाली है वह उसे फर्श से अर्श पर ले जाएगी या फिर पटकेगी। जानने के लिए देखिये अगले भाग मे…।

(नशा करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। हम किसी भी प्रकार से नशे का समर्थन नहीं करते है। हम आपके सुरक्षित भविष्य की कामना करते है।)

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