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एक महिने बाद अविनाश के एड फिल्म की शूटिंग शुरु हो गई, जिसमे कुल चार एड शूट होने थे। इनमे से सभी एड में रणवीर शामिल था। जिसमें से तीन एड ग्रुप में और एक एड सोलो था। यह रणवीर के लिये बहुत बडा मौका था, उसने आज अपने सपनो की ओर एक कदम और बढा लिया।। शूट कुल दो स्थानो मे होने वाले थे, जिसमे से एक मुम्बई और दूसरा गुजरात मे था। पहला शूट गुजरात लोकेशन में होने वाला था, जहाँ तीन शूट होने वाले थे। शूट के एक दिन पहले सबको लोकेशन में जाना था।

रणवीर के जीवन का पहला शूट था और वो अंदर से बहुत नर्वस लग रहा था। पहले उसका सोलो एड शूट किया जाना था, लेकिन उसकी हालत को देखकर पहले ग्रुप शूट करने का फैसला लिया गया। शूट का पहला टेक रणवीर के मुह से कुछ निकल ही रहा था। इसी तरह लगातार दस टेक होने चले लेकिन रणवीर लगातार नर्वस हो रहा था। जिसके कारण वह हतोत्साहित हो रहा था। निर्देशक साहब मे सभी को पंद्रह मिनट के ब्रेक दिया और रणवीर के पास जाकर बोले।
निर्देशक- क्या हुआ यंग मैन?
रणवीर- कुछ नहीं सर, जब भी कुछ बोलने की कोशिश करता हूँ तो जैसे ज़ुबान में ताला लग जाता है। और मन में कुछ गलत डायलॉग का डर बना रहता है।
निर्देशक- ऐसा कॉमन है, तुम बिल्कुल मत सोचो कि यहाँ कोई तुम्हे देख रहा है और जो डायलॉग है बोल दो। अगर कुछ गलत बोलोगे तो रीटेक है न। टेंशन मत लो, बिंदास बोलो।
रणवीर- थियेटर मे तो इतने लोगो के सामने डर नहीं लगता, लेकिन यहा कोई नहीं है फिर भी इतना डर।
निर्देशक- यंग मैन, ये कैमरा है न, खुद में लाखो को समेट के रखता है। और तुम्हारे मन को पता है कि एड के बाद करोडो लोग इसे देखने वाले है, इसलिये डर रहे हो। डरो मत कुछ नहीं होगा।
निर्देशक- चलो…… चलो एवरीबडी बैक टू वर्क।

निर्देशक साहब की बात सुनकर जैसे रणवीर का उत्साह फिर लौट आया, हालाकि दो – तीन रीटेक लगे लेकिन उसका शूट बहुत अच्छा हुआ। अगले दिन एक ग्रुप और एक सोलो शूट होने वाले थे। तो रात को सबने घूमने और पार्टी करने का प्लान किया। रात को निर्देशक ने कही से शराब का जुगाड लगाया (गुजरात में शराब की बिक्री बैन है)। सभी ने शराब पी, लेकिन रणवीर ने शराब पीने से इंकार कर दिया।

रात को 12 बजे लौटते समय एक स्कूटी सवार महिला ने गलत साइड से गाडी टर्न की, जिससे गाडी से टक्कर हो गई। जिससे महिला को स्कूटी सहित गिर गई और उसे कुछ चोटे भी आई। महिला ने वही बवाल मचा दिया और जोर-जोर से हल्ला करने लगी और पुलिस को फोन लगा दिया। रणवीर ने मौके को देखते ही चालक सीट से निर्देशक साहब को हटाकर खुद बैठ गया। पुलिस के आते ही बात बढने लगी, पुलिस सभी को पुलिस स्टेशन ले गई। रणवीर ने पुलिस को बताया कि महिला ने गलत साइड से टर्न किया, जिसके कारण टक्कर हुई। पुलिस ने वहाँ स्थित ट्रैफिक कैमरा की फुटेज निकलवाई तो पुलिस में महिला को वापस भेज दिया। लेकिन निर्देशक साहब ने महिला को गाडी की मरम्मत और इलाज के लिये कुछ पैसे भी दिये।

रणवीर- तो साहब हम लोग चले।
पुलिस- कहाँ जाओगे? एक्सीडेंट केस को सॉल्व हो गया, लेकिन जो तुम लोगो ने इतनी शराब पी रखी है, इसका क्या? पता नहीं गुजरात में शराब बैन है।
रणवीर- सॉरी सर, गलती हो गई।
पुलिस- शराब कहाँ मिली?
रणवीर- सर, बस ऐसे ही आज पार्टी करने का मूड था, तो बस कही से मिल गई।
पुलिस- बहुत होशियारी सूझ रही। कहाँ से आये हो, क्या करते हो आई डी दिखाओ।
रणवीर- सर हम लोग मुम्बई से आये है, यही हमारा एड शूट है, तो बस वही आये थे।
रणवीर- सर चाय पियेंगे।
पुलिस- चलो पीके आते है।
रणवीर और पुलिस अधिकारी चाय पीने गये और लौटकर सभी को घर जाने के लिये बोला।

अगले दिन शूट पूरा करके सभी मुम्बई के लिये निकल गये। अब एक एड की शूटिंग मुम्बई में होनी थी। इस बार वह आत्मविश्वास से भरा अच्छा शॉट दिया। एड फिल्म देखकर रिया और अविनाश काफी इम्प्रेस हुये। एड रिलीज होने पर रणवीर को अच्छा रिस्पोंस मिला और कई निर्देशको और एड शूट कम्पनी के फोन भी आने लगे। जिसके बाद उसने कई एड फिल्मे भी शूट की।

अब रणवीर एड फिल्म की दुनिया मे जाना पहचाना नाम बन गया। लेकिन उसकी मंज़िल तो कही और ही थी, इसलिये वह अब टीवी सीरियल और फिल्मी दुनिया में भी हाथ आजमाने लगा। काफी समय बीत गये लेकिन वह मंज़िल की ओर एक कदम भी नहीं ले पाया। हालांकि उसका जीवन पहले की अपेक्षा अब पटरी में लौटने लगी थी, लेकिन फिर भी वह अपनी नाकामयाबियो से परेशान था। वह दिन रात अपने आप को धिक्कारता और बस अगले मौके के तलाश में इधर-उधर हाथ पैर मारता। अब उसकी इस हालत ने एड फिल्म के काम में भी असर पडने लगा था। दो-तीन एड फिल्म उसके हाथ में आने के बाद भी चले गये। लेकिन उसने अभी हार नहीं मानी थी।

अब वह और अधिक मेहनत करने लगा, लगातार आठ-आठ घंटे प्रैक्टिस करता। इस तरह दो महीने से अधिक होने चले। अब उसने एक टीवी सीरियल मे लीड रोल के ऑडीशन दिया और उसका चयन हो गया। अब वह दिन भर बिज़ी रहने लगा, बंगले में जैसे वह एक मेहमान की तरह हो गया। जिससे बंगले की हालत खराब होने लगा, हर तरफ गंदगी, कोई ध्यान रखने वाला नहीं।
तब राणा साहब ने भी रणवीर को डांट लगाई, जिसके बाद उसने बंगला छोड दिया और नया घर किराये पर ले लिया।

नये घर में उसका मन ही नही लग रहा था, इसलिये वह सारा सारा दिन सेट पर ही रहता था। उसका शो अच्छा हिट हो रहा था। जिससे उसकी अच्छी खासी कमाई होने लगी। अब शो में एक हफ्ते उसका शूट नहीं था, जिससे उसने कानपुर जाने का निर्णय लिया। घर मे पापा की तबियत काफी खराब थी या कह लो कि इलाज़ के सहारे जीवन की गाडी आगे बढ रही थी। अब वह काफी प्रसिद्ध हो गया था, उसके घर के पास लोगो की भीड लगी रहती थी। कभी ऑटोग्राफ तो कभी फोटोग्राफ वाले लाइन लगाये रहते थे। देखते ही देखते एक हफ्ते बीत गये, अब उसका मुम्बई लौटने का समय हो चला। लेकिन दस सालो मे पहली बार उसे मुम्बई जाने की इच्छा नहीं हो रही थी।

मुम्बई आने पर सबसे पहले बडापाव वाले चचा के पास गया, तो देखा कि आज उनकी दुकान नहीं लगी थी। आस पास पता किया, तो जानकारी मिली कि दो महिने पहले एक कार के एक्सीडेंट में उनकी मृत्यु हो गई। उसको ऐसे झटका लगा, जैसे पैर तले जमीन ही निकल गई हो। उसका मन बेचैन था, किसी तरह वह अपने रूम मे पहुचा। आज वह बहुत दुखी था और अकेले मे आज वह जी भर के रोना चाहता था। लेकिन उसके आंसुओ ने भी उसे धोखा दे दिया।

अगले दिन सुबह जल्दी ही वह सेट पर पहुच गया और रोल की प्रैक्टिस करने लगा। धीरे-धीरे सभी स्टाफ सेट पर आने लगे और फिर काम मे व्यस्त हो गया। सेट पर आज उसका लुक उसके एक्ट से मेल नहीं खा रहा था। कई टेक हो गये लेकिन परफेक्ट शॉट के लिये निर्देशक बार-बार टेक ले रहे थे। जब शॉट सही नही मिले, तो दस मिनट का ब्रेक ले लिया। ब्रेक के दौरान निर्देशक रणवीर के पास आकर बोले, क्या हुआ आज टेंशन में लग रहे हो।
रणवीर- हाँ सर, पापा की तबियत बहुत खराब है और एक पहचान के चचा थे, तो कल पता चला कि दो महिने पहले उनका भी स्वर्गवास हो गया।
निर्देशक- देखो रणवीर, ये किस्मत भी बहुत कुत्ती चीज़ होती है। हमको जिस अनुपात मे खुशियां देती है, उसी अनुपात में गम भी देती है। लेकिन ये जिंदगी ये ऐसे ही चली है और चलती रहेगी। किसी के आने जाने से इसे कोई फर्क नहीं पडता।
रणवीर- जी सर।
निर्देशक- वैसे भी तुम्हारा पहला सीरियल है, तुम्हे तो बहुत आगे जाना है। लेकिन ये फिल्मी दुनिया बहुत कमीनी है। आपके जीवन मे क्या चल रहा, इसे कुछ फर्क ही नहीं पडता। ये केवल परफेक्ट चाहती है। कोई समस्या हो तो बताओ।
रणवीर- सर, वास्तव में मेरा कुछ मूड खराब है और ये सीन शादी का है और खुशियो भरा एक्सप्रेशन देना है, तो कुछ देर आप मेरे बिना शूट कर ले, थोडा मै रेस्ट कर लू।
निर्देशक- ओके, नो प्रॉब्लेम, यू कैन रेस्ट फॉर सम टाइम।
रणवीर- थैंक यू, सर।

कुछ देर के आराम के बाद वह फिर से शूट मे पहुचा और अब वो टेंशन फ्री लग रहा था, उसने एक से बढकर एक अच्छे सीन दिये। देर रात शूट खत्म हो गया। इस तरह सीरियल लाइन मे उसे सालभर होने लगे, अब वह जाना माना एक्टर बन गया। कई छोटे विवादो मे भी उसका नाम शामिल रहा। अब वह भी दोहरी जिंदगी जीना सीख गया था, घर मे पापा के तबियत की टेंशन तो सेट मे रोल की एक्टिंग।

लेकिन वह अभी भी रुका नहीं था, वह फिल्मो के लिये भी ऑडिशन देता रहता। उसे एक दो फिल्मो मे छोटे-मोटे रोल का मौका मिला, लेकिन उसने इंकार कर दिया। उसका मानना था, कि एक बार छोटे एक्टर का थप्पा लग गया। तो कभी बडा काम नहीं मिलेगा। इस तरह वह कई फिल्मो मे अपना हाथ आजमाता रहा और साथ मे अपना काम जारी रखा।

बडी मसक्कत के बाद उसे एक फिल्म में लीड रोल का मौका मिल गया, वह बहुत खुश था। वह मिठाई लेकर सेट पर पहुंचा, सभी को मिठाइया खिलाई। जब वह मिठाई लेकर निर्देशक के पास गया, तभी उसे उनकी सुख दु:ख के अनुपात वाली बात याद आई। जैसे उसका मन ही बैठ गया, वैसे भी उसकी जिंदगी में सुख और दु:ख बारी-बारी से अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहते।

अब जिंदगी, रणवीर के साथ क्या खेल खेलने वाली है वह उसे फर्श से अर्श पर ले जाएगी या फिर पटकेगी। जानने के लिए इंतेज़ार करे अगले भाग का…।

(नशा करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। हम किसी भी प्रकार से नशे का समर्थन नहीं करते है। हम आपके सुरक्षित भविष्य की कामना करते है।)

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