उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में रणवीर नाम का एक लडका रहता था, जिसके परिवार में उसके पिता संजय गुप्ता, माता उर्मिला गुप्ता और बडी बहन जानकी थे। उसके पिता जिले में ही बिजली विभाग में चपरासी के पद पर कार्यरत थे, जिनकी छोटी सी सेलरी से उनके परिवार की केवल मूलभूत आवश्यकताये ही पूरी हो पाती थी, यहाँ तक कि विद्यालय की फीस तक भरने में भी समस्याये आती थी। इसलिये मां उर्मिला भी घर का काम काज निपटाने के बाद कपडे सिलने का काम करती थी। जिससे किसी तरह वह संजय की मदद कर परिवार चलाने में सहायता करती थी। मूलभूत जरूरतो के साथ उनका परिवार खुशी खुशी रहता था।

रणवीर बचपन से ही तेज दिमाग और पढने में अव्वल था, वो कक्षा में अच्छा स्थान प्राप्त करता था। पढाई के साथ वो क्रिकेट खेलने, फिल्मे देखने, अभिनय करने का भी बहुत शौकीन था। वो बचपन से ही विद्यालय में होने वाली प्रतियोगिताओ में भाग लेता था। हर उत्तर प्रदेशवासी की तरह वह भी बिग बी(अमिताभ बच्चन जी) का बहुत बडा प्रसंशक था। बचपन से ही वो अमित जी से मिलने के ख्वाब देखता था। जैसे जैसे वो बडा हुआ, तो घर की आर्थिक स्थिति के कारण उसको समस्यायें होने लगी थी, जिस कारण उसने जिले की राम लीला में भी अभिनय करने लगा था। सन् 2010 का साल था, अब जूनियर कालेज़ में प्रवेश लेना था। तो संजय ने किसी तरह प्रवेश तो करा दिया, लेकिन जानकी दीदी की पढाई और शादी की तैयारी की समस्या के कारण स्कूल फीस, ट्यूशन फीस भी समय पर नहीं दे पाते थे।

किसी तरह रणवीर ने अपनी पढाई जारी रखी, अब तो उसकी रैकिंग भी गिरने लगी। जिससे वह तनाव में रहने लगा। उसके शौक का तो जैसे दम ही घुटने लगा और अभिनय का शौक मजबूरी का दामन थामकर किसी तरह राम-लीला के रूप में ज़िंदा थी। फरवरी, 2012 का समय था, पापा की बिमारी में काफी खर्च हो जाने के कारण वो कालेज़ की फीस भरने में सक्षम नहीं थे। जिस कारण कालेज़ प्रबंधन ने परीक्षा का प्रवेश पत्र देने से इंकार कर दिया था। आज रणवीर बहुत गुस्से में था और कालेज़ के बाद घर न जाकर अपने दोस्त कमल के घर चला गया। कमल के पिता प्रापर्टी डीलर थे, अतः उनकी माली हालत काफी अच्छी थी। टाइम पास करने के लिये कमल ने वीसीडी में रणवीर कपूर की फिल्म रॉकस्टार लगा दी।

फिल्म में रणवीर कपूर का जीवन और उसके संघर्ष से वह बहुत प्रभावित हुआ। जैसे यह फिल्म देखकर उसके ख्वाब, उसके शौक फिर से जीवित हो गये। लेकिन परीक्षा का तनाव अभी कम नहीं हुआ था, कि तभी कमल के पिता वहॉ आ गये। चूंकि कमल, रणवीर का काफी अच्छा दोस्त था और वह उसके घर कई बार जा चुका था, तो उसके घर वाले उसे अच्छे से पहचानते थे। कमल ने अपने पापा को रणवीर की समस्या और कालेज़ प्रशासन के रवैये के बारे में बताया, तो उसके पापा ने उसे तनाव न लेने और प्रवेश पत्र दिलाने का आश्वासन दिया।

कालेज़ की परीक्षा पास करने के बाद आगे की शिक्षा जारी रखने और अच्छा कालेज़ पाने की चाहत में उसने कई जगह आवेदन दिया और अच्छे अंको के साथ वो पास तो कर लेता था, लेकिन पैसे न होने के कारण प्रवेश नहीं मिल पा रहा था। जिसके बाद उसने कई संस्थानों में स्कॉलरशिप के लिये आवेदन किया, उत्तर प्रदेश सरकार के स्कालरशिप हेतु भी आवेदन दिया, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। देखते ही देखते उसके सभी दोस्तो का दाखिला बडे-बडे कालेज़ो में हो गये, लेकिन रणवीर की मंज़िल के तो आसार ही नज़र नहीं आ रहे थे।

कुछ महीने बाद, रणवीर बाज़ार से दिवाली का सामान खरीदकर घर लौट रहा था। रास्ते में उसे अपना पुराना सहपाठी राकेश मिला, जो कि कक्षा के सबसे बदमाश लडकों में से एक था और पढने में काफी कमजोर था।
रणवीर- और भाई राकेश! कैसा है तू?
राकेश- झकास। तू बता, तेरे क्या हाल चाल है टॉपर बाबू।
रणवीर- काहे का टॉपर, सब बस कहने की बाते है। तू बता, आज कल कहॉ है, दिखता नहीं अब। पहले तो जहॉ देखो, तू ही तू नज़र आता था।
राकेश- यही तो अपने जलवे थे। अब तो साला, लखनऊ में क्लास, पढाई, हॉस्टल में ही दिन निकल जाता है। अभी तो दिवाली के लिये इधर आया हू।
रणवीर- अबे, राकेश द बिगबॉस कब से पढने लगा, तेरे मुह से ये सब बाते अच्छी नहीं लगती।
राकेश- तू बता, अब कहा के टॉपर लिस्ट की शोभा बढा रहा है।
रणवीर- नहीं यार, वो पापा की तबीयत सही नहीं है, तो पास में सरकारी कालेज़ में एडमिशन ले लिया।
कालेज़ का नाम सुनते ही राकेश हॅसने लगा।
राकेश- अबे, ये अपना धोबीघाट कालेज़। यहॉ तो बहुत सुट्टे जलाये है। चल कोई बात सबका अपना अपना नसीब है।

राकेश तो वहा से चला गया था, लेकिन उसकी वह हसी रणवीर के कानों में गूंज़ रही थी। रणवीर का मूड खराब हो गया, और पूरी दिवाली उसने पटाखो और मिठाई को हाथ तक नहीं लगाया। राकेश की हंसी उसके कानों में गूंजती रहती थी, उठते-बैठते, सोते-जागते बस यही उसके दिमाग में चल रहा था। फिर एक दिन उसने फैसला किया, कि नसीब में चाहे जो भी लिखा हो, लेकिन मैं अपना तक़दीर खुद लिखुंगा। उसने अपना सामान उठाया, थोडे पैसे लिये और घर में चिट्ठी रखकर निकल गया।……..


(आपको ये कहानी कैसी लगी, नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे आपके प्रतिक्रिया के आधार पर मैं जल्दी ही अगला भाग लाने की कोशिश करूंगा।)

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!