राघव और प्रिया अपने रिश्ते में लम्बे साथ के बाद किन्ही कारणो या अविश्वास के कारण रिश्ता टूटने लगता है, तो तलाक़ के समय कोर्टरूम के बाहर पति-पत्नी के मन के कश्मकश और उनकी आखिरी बातचीत के पलो में उनके जीवन और उनके रिश्ते की रस्साकशी को दर्शाने का प्रयास है।

काश! प्यार तुम्हारा सच्चा होता,
तो रिश्ता हमारा पक्का होता,
न होती दूरियां हमारे दर्मियां,
दोनो में न पंगा होता।

प्रिया:- काश! विश्वास तुम्हारा पक्का होता,
न कान तुम्हारा कच्चा होता,
कर लेते गर मेरी बातो पे भरोसा,
तो प्यार हमारा पक्का होता।

राघव:- काश तेरी बेवफाई में मुझे ऐतबार न होता,
खुदा करे मुझे तुझसे प्यार न होता,
तड़पता न तेरे दीदार के खातिर,
मेरे किस्मत में तेरा नाम न होता।

प्रिया:-माना कि दरार थे बड़े रिश्ते में,
माना कि सवाल थे हर किस्से में,
पर अगर सुन लेते तुम बात मेरी,
तो ख्वाब हमारा सच्चा होता|

राघव:- तू कहती है कि प्यार तेरा सच्चा है,
तेरा अहसास मेरे लिए अच्छा है,
गर सच है तो तेरे प्यार की दुहाई दे,
बातो की नही अपने ईमान की सफाई दे।

प्रिया:- माना कि नजदीकिया बहुत थी हमारे रिश्ते में,
माना कि मौजूदगी थी उसकी हर किस्से में,
हां हम दोनो में लगाव बहुत था,
पर कोई और नहीं मेरा अनुज था।

राघव:- माना कि तेरे आशिको का इल्म नहीं मुझको,
तेरे हर इरादो का, तेरे वादो का इल्म नहीं मुझको,
पर गैरो की बाते कोई हर वक्त नहीं कहता,
उसके सिवा तुझे मेरे लिये वक़्त नहीं रहता।

प्रिया:- हां रहते थे साथ हर घड़ी हम,
करते थे बात हर घड़ी हम,
पर रिश्ते में हमारे कोई बात न थी,
हम दोनो में कोई जज्बात न थी।।

इसके बाद प्रिया रोने लगती है और राघव एक टक उसे देखते रहता है। उसके मन में दर्द उठता है और वह चाहता है कि उठ कर आंसू पोछे, लेकिन उसकी वह हिम्मत नहीं जुटा पाता।

प्रिया:- इस अकेलेपन में कभी वक़्त नहीं कटता,
तुम्हारे पास भी मेरे लिये वक़्त नहीं रहता,
घडी-घडी तेरे साथ का इंतेज़ार करती हूँ,
दिल चीर के देख लो सिर्फ तुमसे ही प्यार करती हूँ।

राघव कुछ बोल न सका और बस चुप ही रहा।

प्रिया:- तुम ज़िंदगी में राम बन आये, मेरा लक था,
मेरे हर सांस, हर धडकन में तुम्हारा हक़ था,
पर मेरी ज़िंदगी में किसी और का होना,
खाती हूँ बच्चों की क़सम, सिर्फ तुम्हारा शक़ था।

अब राघव भी रो पडा।

राघव:- आई थी मेरी ज़िंदगी में आस बनकर तुम,
रहती हो मेरे दिल में सांस बनकर तुम,
मेरे हर गलती, हर गुनाह को साफ कर दो,
राम क़सम, इक बार मुझे माफ़ कर दो।

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