जग हारी मैं बलिहारी पग-पग बोलूं बतिया,
बरसाने में मैं बलि जाऊ जागू सारी रतिया।
चरण उघारे, अधर तिहारे, देखत तिरछी अखियां,
वृन्दावन में रास रचावै, रज-रज बहके सखियां।।

बांस बजैया, पंख लगैया, बैठन यमुना तीरे ,
गोपियन संग रास रचावै, मन रीझे धीरे-धीरे।
श्याम वरण, माखन हरण, चले दाऊ संग मथुरा,
काक करम, प्राण हरण कर धोई सारी वसुधा।।

छोड़ चला वा साथ हमारन जा बैठन वा मथुरा,
नैन हमारन नीर बहावै, भीगन सारी वसुधा।
याद में उसकी रति बिगाडै, जागी सारी मइया,
घर‌‌‌-घर घूमे राग लगावै भटकै सारी गइया।।

मथुरा मा नृप रास रचावत, देखत सारी जगिया,
गोवर्धन धर नैनं ढूढै, घूमै सारी बगिया।
भूलहि बातन, भूलहि रातन, भूलहि वाद मुरलिया,
राधिका संग प्रेम मा जैकर काटत नहिया रतिया।।

श्याम सलोने, हे मन मोहने, तांकू सारी रैना,
रूप सलोना, रास रचौना, देखत तरसे नैना।
नैन कजरारे, अधर कटारे, कबो आबहुं वृन्दावन मा,
बंस बजैया, गौर चुरैया, पग-पग देखहि अंगना॥

जग हारी मैं बलिहारी,पग-पग बोलूं बतिया,
वृन्दावन का राजदुलारा भूलहि सारी सखियां।
मइया रोवै, गइया रोवै, रोवै कदम चिरैया,
बरसाने मा घर घर रोवै, रोवै रास रचैया॥

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