1)-
जिसकी झलक प्यार का समुंदर है,
जिसका मुखडा चांद से भी सुंदर है,
जिसका साथ होना खुशियों का भंडार है,
वो कुछ और नहीं, बस मां का प्यार है।

खुद धूप में तपकर, बच्चों को आंचल देती है,
अपनी नींदे खोकर, बच्चों को अपने सेती है,
खुद सोकर भूखा, बच्चे को दूध पिलाती है,
छिपाकर आंसु अपने, सबको ढांढस बंधाती है।

मां अगर साथ है, तो सच सारे सपने है,
जिसके होने से सारे पकवान अपने है,
ममता का सागर, जीवन का संस्कार है मां,
हर घर की देवी, ईश्वर का उपहार है मां॥

2)- मां कौन है?
“मां कौन है?” ये प्रश्न अधूरा है,
गर मां साथ है तो संसार पूरा है।

मां वो है, जो जीवन का हर रंग दिखाती है,
क्या अच्छा, क्या बुरा सिखलाती है,
मां वो है, जो जीवन से पहचान कराती है,
हर खुशी, हर गम में साथ निभाती है॥

मां वो है, जो हर मोड में खुशी जाती है,
देकर सबको पकवान खुद सूखी रोटी खाती है,
मां वो है, जो निराश कभी न होती है,
सबका भरती पेट, पर खुद भूखी सोती है॥

मइया का है रूप निराला. दुख को हरने वाली है,
कभी दोस्त, कभी बहन हर रूप में निराली है,
ममता का आभूषण पहने, विद्या का भंडार है,
कभी दुर्गा, कभी चंडिका, शक्ति का श्रृन्गार है॥

3)- वो लम्हे जो बीत गए
वो लम्हे जो बीत गए, नित रहके तेरी ख्वाबों में,
कुछ बसके तेरी आंखों में, कुछ जगते तेरी बाहों में।

सुबह-सुबह जब आंखे मींझे, नीर बहते जब-जब आंखो से,
दम भरते तेरी सांसों से, हम लिपटे तेरी बांहों में।

जब भूख लगे तो रस्ता देखे, टक-टक तेरी राहों के,
लिपट तेरे कांधो से फिर, जग देखे तेरी बातों से।

हाथ संभारे घर से निकरे, संवर-संवर जज्बातों से,
भटक-भटक गलियारों से, आ लिपटे तेरी बाहों में।

जब-जब मुझको डांट मिले, वारि झरते तेरी आंखों से,
मार मिले जब भी मुझको, तो प्यार मिले तेरी बातों से।

सुनी कहानी परियों की, जब नींद भरी इन रातों में,
सीखें सारी दुनिया दारी, अनुभव धरते अहसासों से।

वो लम्हे जो बीत गए, नित रहके तेरी ख्वाबों में,
कुछ बसके तेरी आंखों में, कुछ सोते तेरी बाहो में॥

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