नारी

दुनिया ने तेरी त्याग का कैसा सिला दिया,

कभी बहू, कभी सास, बीवी बना दिया।

मां और बहन के रिश्तों का कोई रास न रहा,

बेटी तेरी ज़िंदगी का आस न रहा।

अब तेरी ज़िंदगी का ख्याल हो,

उठाले शस्त्र फिर चाहे बवाल हो।

खुद करले हिफाज़त अपनी, उठा ले तलवार,

नष्ट करदे सारे दरिंदे, बचा ले अपनी लाज़॥

————————————————————————–

लड्कियां

आंखों का तारा होती है बेटियां,

घर का उजाला होती है बेटियां,

तू शक्ति की सूरत है, तू श्रद्धा की मूरत है,

बिना तेरे संसार की कल्पना कर नही सकते,

तेरे बिना हम आगे बढ नही सकते।

————————————————————————-

फैशन

ये जो तूने फैशन का चस्का लगाया है,

सच्चाई त्याग कर झूट का मस्का लगाया है,

तू शायद कामयाब हो जाये इन दिखावो के सहारे,

तू आसमां छू जाये इन ख्वाबों के सहारे,

लेकिन झूट से कभी ज़िंदगी नहीं सवरती,

और झूट के आगे कभी सच्चाई नहीं छुपती॥

————————————————————————

एक निशानी

क्यूं न आज मैं तेरे प्यार की कहानी कहूँ,

क्यूं न मैं तेरी ज़िंदगी की निशानी पढूं।

कि तेरे त्याग ने न जाने क्या क्या सपने तोडे,

कि तेरे त्याग ने न जाने कितने अपने छोडे।

तूने मेरे खातिर अपने आस से मुंह मोडा,

के तूने मेरे खातिर अपने बाबुल का घर छोडा।

के नारी ज़िंदगी संघर्ष की कहानी है,

के मां मेरी ज़िंदगी तेरे त्याग की निशानी है॥

—————————————————————-

वक़्त की नज़ाकत

कुछ बात ही अलग थी उनमें, हर पल मुस्कुराते थे,

बातें करके अनसुलझी, हरदम इठ्लाते थे।

मेरे हर वादे पर, दुनिया वार जाते थे,

हर छोटे-छोटे यादों पर, आंसू छलकाते थे।

मेरी नादानियों पर, हर समय रूठ जाते थे,

जितना भी गुस्सा हूँ मैं, हर वक़्त मनाते थे।

वक़्त की नज़ाकत से, जाने क्या क्या है सितम ढाया,

छीन कर बचपन मेरा, दे दी हाथों में माया,

मां से हर रिश्ता पुराना हो गया,

मेरा रूठना उनका मनाना, टेढी-मेढी बातें बनाना,

जाने कहा खो गया,

दौड़ती दुनिया में इस कदर सो गए,

जैसे बचपन के ख्वाब जवानी में खो गये॥

——————————————————————–

5 thoughts on “Naari shakti- women empowerment”
  1. Kabhi garbh me khamosh kar deta h ye jamana
    Kabhi apne bhi kar dete hai inko begana
    Anurodh sadaiv hai mata pita se ki kabhi betiyo ko atyachaar sahna na sikhana🙏🙏🙏🤨🙏🤨🤨

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!